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तिलक का अन्य नेताओं से एक विशेष अंतर यह था कि उनके लिए राष्ट्रीयता केवल एक राजनीतिक कल्पना मात्र नहीं थी बल्कि एक ऐसी भावना थी जो उनके समस्त जीवन को प्रभावित किए हुए थे। वे एक ऐसे पहले नेता थे जिन्होंने अपने वक्तव्य से यह साबित किया था कि अंग्रेज़ी आधिपत्य का मूल कारण अनैतिक था। तिलक ने अपने पूरी जिंदगी में अंग्रेजी नैतिक उच्चता के मंत्र जाल को तोड़ने की भरसक कोशिश की थीं।
उनका लक्ष्य महाराष्ट्र के लोगों को जागृत करना था। अन्य समकालीन विचारकों में से तिलक के राजनीतिक चिंतन में एक विशेषता रही थी।वह यह था कि उन्होंने न सिर्फ भारत वासियों के लिए प्रशासन से संबंध्द होने का अधिकार मांगा था बल्कि भारत में स्वराज्य को एक अधिकार के रूप में लाना भी चाहते थे। अंग्रेज़ों द्वारा सुविधाएं दिए जाने की अपेक्षा उन्होंने अपने देशवासियों की ओर से अधिकारों को प्रस्तुत करना अधिक आवश्यक समझा। इस संबंध में उनके एक वाक्य प्रसिद्ध है
” स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूंगा। “
तिलक ने राष्ट्रीयता पाने के लिए त्याग बलिदान और कष्ट सहन करने की मार्ग को आधिक लोकप्रिय बनाया है । इसलिए हम तिलक को एक आधुनिक भारत का निर्माता कहा जाता हैं।