

नई दिल्ली। अनुसूचित जाति/जनजाति (एससी/एसटी) के लिए लोकसभा तथा राज्यों की विधानसभाओं में आरक्षण जारी रखने के लिए सरकार ने ‘126वाँ संविधान संशोधन विधेयक’ सोमवार को लोकसभा में पेश किया।
विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सदन में यह विधेयक पेश किया। उन्होंने कहा कि एससी/एसटी के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में सीटें आरक्षित करने का प्रावधान फिलहाल 25 जनवरी तक के लिए है। इसे 10 साल के लिए और बढ़ाने के उद्देश्य से यह विधेयक लाया गया है।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय ने यह कहते हुये विधेयक पेश किये जाने का विरोध किया कि इसमें एंग्लो-इंडियनों के लिए लोकसभा में दो और राज्यों की विधानसभाओं में नौ सीटों पर नामांकन का प्रावधान समाप्त किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर और देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने संविधान के अनुच्छेद 334 के जरिये एससी/एसटी और एंग्लो इंडियनों के लिए सीटें आरक्षित रखने की व्यवस्था की थी। सरकार एंग्लो इंडियनों के 70 साल से चले आ रहे अधिकार को समाप्त करना चाहती है।
प्रसाद ने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, देश में सिर्फ 296 एंग्लो इंडियन रह गये हैं। इसके बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को पेश करने की अनुमति प्रदान कर दी।