
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सरदार, गांधी के अनुयाई सन 1917 में ही बन चुके थे और जालियांवाला बाग हत्याकांड के अवसर पर उन्होंने अहमदाबाद की हड़ताल और जुलूस का नेतृत्व करके राजनीतिक आंदोलन में भाग लेना भी आरंभ कर दिया था। जिस महान कार्य के फलस्वरूप श्री पटेल को सरदार की उपाधि दी गई और जिसने भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में अपने अमिट पदचिन्ह छोड़ने का गौरव प्राप्त किया था,वह था बारदौली का अहिंसा संग्राम। यूनान देश के इतिहास में थर्मापौली के युद्ध की यह घटना तीन हज़ार वर्ष बीत जाने पर भी आज तक अविस्मरणीय मानी जाती है। उसमें दो तीन सौ देश भक्तों की टोली ने एक तंग पहाड़ी मार्ग पर मोर्चा लगाकर आक्रमणकारी विशाल सेना का मुकाबला किया था और अपनी वीरता का प्रदर्शन किया था।
स्वतंत्रता संग्राम में सरदार पटेल ने जितनी महत्वपूर्ण कार्य किये हैं उनका महत्व देश के किसी अन्य नेता के कार्यों में नहीं मिलता है।सरदार पटेल राष्ट्रभक्त होने के साथ ही भारतीय संस्कृति के भी महान पृष्ठपोषक थे। वे सदा अत्यंत सादी देशी ढंग की वेशभूषा में रहते थे और घर का वातावरण प्राचीन ढंग का ही रखते थे।
इस प्रकार सरदार पटेल का जीवन प्रत्येक मनुष्य के लिए एक बहुत बड़ा आदर्श उपस्थित करता है ।वह यह कि मनुष्य को केवल कमाने खाने की जिंदगी ही व्यतीत नहीं करनी चाहिए, वरना देश और समाज की रक्षा का प्रश्न उपस्थित होने पर निजी स्वार्थ को त्याग कर उसी को प्राथमिकता देनी चाहिए। यदि देश और समाज का पतन हो गया तो हमारी व्यक्तिगत उन्नति भी बेकार हो जाएगी। इसलिए जो कोई अपने मानव जन्म को सार्थक करना चाहता है ,उसको अवश्य ही अपनी शक्ति और साधनों का एक अंश समाज सेवा के निमित्त लगाना चाहिए। जो इसकी उपेक्षा करता है वह एक प्रकार बेईमान के समान है।