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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य द्वारा छोड़ी गईं गोरखपुर एवं फूलपुर लोकसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी की पराजय और बहुजन समाज पार्टी समर्थित समाजवादी पार्टी के उम्मीदारों की जीत को विपक्ष ने 2019 में देश में बदलाव के संकेत करार दिया है।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने संसदीय सीटों पर हुए उपचुनाव परिणाम में आज जीत हासिल करने वाले उम्मीदवारों को बधाई दी और कहा कि इन नतीजों से साफ हो गया है कि भाजपा के प्रति लोगों में भारी गुस्सा है और लोग उसके उम्मीदवार को हराने के लिए वोट करने लगे हैं।
गत वर्ष उत्तर प्रदेश विधानसभा में भाजपा की प्रचंड बहुमत से जीत के बाद गोरखपुर से सांसद योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री और फूलपुर से सांसद एवं तत्कालीन प्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्री मौर्य को उप मुख्यमंत्री बनाया गया था जिसके बाद उन्होंने अपनी अपनी सीटों से इस्तीफा दे दिया था। गोरखपुर से योगी आदित्यनाथ पांच बार सांसद रहे हैं।
उपचुनाव में सपा के प्रवीण निषाद ने अपने निकटतम प्रतिद्वन्दी भाजपा के उपेन्द्र शुक्ल को 21961 मतों से पराजित किया है। इसे योगी आदित्यनाथ के लिए व्यक्तिगत क्षति माना जा रहा है। गांधी ने ट्वीट किया कि आज के उपचुनावों में जीतने वाले उम्मीदवारों को बधाई। नतीजों से स्पष्ट है कि मतदाताओं में भाजपा के प्रति बहुत क्रोध है और वे उन गैर भाजपाई उम्मीदवार के लिए वोट करेंगे जिनके जीतने की संभावना सबसे ज़्यादा होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में नवनिर्माण के लिए तत्पर है लेकिन यह रातों रात नहीं होगा।
इससे पहले लोकसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संसद भवन परिसर में पत्रकारों से कहा कि भाजपा की जुमलेबाजी, महिला, किसान, मजदूर तथा दलित विरोधी नीति को देश की जनता समझ गयी है। इसी का परिणाम है कि अब बदलाव आना शुरू हो गया है। यह बदलाव उत्तर प्रदेश से पहले राजस्थान और मध्य प्रदेश तथा अन्य क्षेत्रों में हुए उपचुनावों में स्पष्ट हो चुका है।
राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के पार्टी नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार ने जनता का विश्वास खाे दिया है। यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव में सपा की विजय से यह साफ है कि उत्तर प्रदेश की जनता समझ चुकी है कि भाजपा सारे देश में जनता को मूर्ख बना रही है और स्वयं भगवान को धोखा दे रही है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दार्जिलिंग में कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार में उपचुनाव के नतीजे इस बात का संकेत है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार के अंत की शुरुआत हो चुकी है। बनर्जी ने हाल ही में कहा था कि 2019 आने दो, भाजपा का सफाया हो जाएगा। उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद, बसपा की अध्यक्ष मायावती और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को बधाई देते हुए कहा कि यह बड़ी जीत है और अब अंत की शुरुआत हो गई है।
उल्लेखनीय है कि बिहार में महागठबंधन टूटने और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की नई सरकार बनने के बाद पहले शक्ति परीक्षण के रूप में देखे जा रहे लोकसभा की एक और विधानसभा की दो सीटों के उपचुनाव में अररिया लोकसभा और जहानाबाद विधानसभा क्षेत्र में राजद की जीत हुई है जबकि भभुआ में भाजपा की जीत हुई है। अररिया से राजद के मो.सरफराज आलम, जहानाबाद से कुमार कृष्ण मोहन उर्फ सुदय यादव तथा भभुआ से भाजपा की रिंकी रानी पांडेय निर्वाचित घोषित की गई हैं ।
राजनीतिक प्रेक्षक राजेन्द्र प्रताप का कहना है कि उपचुनाव की दोनो सीटों पर पिछड़ों, दलितों और मुस्लिमों का गठजोड़ प्रभावी रहा। राजेन्द्र प्रताप कहते हैं कि मुख्यमंत्री और सत्तारुढ दल का प्रदेश अध्यक्ष अगडी जाति से है। इसे पिछडे और दलित कितनी देर बर्दाश्त करेंगे।
वर्ष 2014 में मोदी लहर के दौरान अगड़े-पिछडे दलित और अन्य जातियां सभी ने भाजपा को समर्थन दिया था। इसी वजह से उसके गठबंधन को उत्तर प्रदेश की 80 में से 73 सीटें मिली थीं। मुलायम सिंह यादव का परिवार को पांच सीटें मिली थीं। सोनिया गांधी और उनके पुत्र राहुल गांधी भी जीत गए थे।
उनका कहना था कि स्थितियां बदली हैं। एक साल पहले प्रचंड बहुमत हासिल करने वाली भाजपा दोनो सीट हार गयी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जादू नहीं चला। गोरखपुर में पहली बार जीत हासिल करने वाली सपा ने भाजपा का मजबूत किला ध्वस्त कर दिया।
पांच बार लगातार इसी सीट से सांसद रहे योगी के मुख्यमंत्रित्वकाल के एक वर्ष के अन्दर ही उन्हें इतनी बडी ‘राजनीतिक हार’ मिली। योगी आदित्यनाथ के इस्तीफे से खाली हुई गोरखपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव के नतीजे ने भाजपा को हिलाकर रख दिया। भाजपा उम्मीदवार उपेन्द्र शुक्ल को समाजवादी पार्टी (सपा) उम्मीदवार प्रवीण निषाद ने कडी पटखनी दी। निषाद ने अपने निकटतम प्रतिद्वन्दी शुक्ल को करीब 22 हजार मतों से हराया।
सपा उम्मीदवार को बहुजन समाज पार्टी, पीस पार्टी और निषाद पार्टी का समर्थन हासिल था। योगी के समर्थक राजेन्द्र सिंह कहते हैं कि गोरक्षपीठ से उम्मीदवार नहीं होने का खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ा। इस सीट पर दस बार गोरक्षपीठाधीश्वर चुनाव जीत चुके हैं। वर्ष 1967 में तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर मंहत दिग्विजय नाथ ने जीत हासिल की थी। उनके निधन से 1971 में यहां उपचुनाव हुआ और मंहत अवैद्यनाथ विजयी रहे। वर्ष 1989 में वह हिन्दू महासभा के टिकट पर संसद पहुंचे, लेकिन 1991 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता। वर्ष 1996 में भी महंत अवैद्यनाथ सांसद बने।
वर्ष 2014 में पहली बार फूलपुर सीट जीतने वाली भाजपा उपचुनाव हार गई। वर्ष 2014 में इस सीट से उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जीते थे। प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु की सीट रही फूलपुर का प्रतिनिधित्व नेहरु जी ने लोकसभा में 1964 तक किया था। उसके बाद 1967 तक विजयलक्ष्मी पंडित (कांग्रेस)वहां से सांसद रहीं।
वर्ष 1969 में जनेश्वर मिश्र (संयुक्त सोशलिस्टपार्टी), 1971 में विश्वनाथ प्रताप सिंह (कांग्रेस), 1977 में कमला बहुगुणा (भारतीय क्रांतिदल), 1980 में बी डी सिंह (जनतादल सेक्यूलर), 1984 में रामपूजन पटेल (कांग्रेस), 1989 में रामपूजन पटेल (जनता दल), 1991 में रामपूजन पटेल, 1996 में जंगबहादुर पटेल (सपा), 1998 में जंगबहादुर पटेल (सपा) 1999 में धर्मराज पटेल (सपा) 2004 में अतीक अहमद (सपा) और 2009 में कपिलमुनि करवरिया (बसपा) से सांसद रहे।
फूलपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के नागेन्द्र प्रताप सिंह पटेल ने अपने निकटतम प्रतिद्वन्दी भारतीय जनता पार्टी के कौशलेन्द्र पटेल को 59460 मतों से पराजित किया।
उप चुनाव में सपा को 342922 मत मिले जबकि भाजपा को 283462 मतदाताओं ने समर्थन दिया। कांग्रेस उम्मीदवार मनीष मिश्रा को 19353 मत प्राप्त हुए जबकि जेल में रहकर चुनाव लड़े निर्दलीय अतीक अहमद को 48094 वोट मिले।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 2014 में भाजपा उम्मीदवार के रुप में 218308 मतों के भारी अंतर से जीत हासिल की थी। दोनों सीटों के नतीजों को राजनीतिक प्रेक्षक राज्य में भावी राजनीति के मद्देनजर पैनी नजर से देख रहे हैं।