

नयी दिल्ली । देश में इस्पात की बढ़ती खपत देखते हुये स्टील अथारटी आफ इंडिया (सेल) अगले एक दशक में अपनी क्षमता में ढाई गुना वृद्धि करने तथा इसके लिये ओडिशा में एक नया संयंत्र स्थापित करने की योजना बनायी है।
इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह और सेल के अध्यक्ष अजित कुमार चौधरी ने शुक्रवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने के लिये 2030 तक देश में इस्पात का उत्पादन बढ़ाकर तीस करोड़ टन करने का प्रस्ताव है। इस अवधि के दौरान सेल का उत्पादन दो करोड़ टन से बढ़ाकर पांच करोड़ टन करने की कार्ययोजना बनायी गयी है जिसके तहत सेल के मौजूदा संयंत्राें की क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जायेगा।
चौधरी ने बताया कि ओडिशा में नया संयंत्र स्थापित करने के लिये वहां की सरकार से भूमि उपलब्ध कराने का आग्रह किया जायेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के इस्पात संयंत्र स्थापित करने के लिये भूमि उपलब्ध है । यदि वह हमें ढाई से तीन हजार हेक्टेयर भूमि उपलब्ध करा देती है तो वहां सेल का नया संयंत्र स्थापित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि हमारे मौजूदा संयंत्रों के पास भी कुछ अतिरिक्त भूमि है जिसका इस्तेमाल विस्तार कार्यों में किया जायेगा।
सेल के उत्पादन शुरु करने के 60 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित इस संवाददाता सम्मेलन में इस्पात मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षाें में देश में इस्पात की प्रति व्यक्ति खपत तेजी से बढ़ी है जो इस समय 69 किलो प्रति व्यक्ति है। इसे 2030 तक बढ़ाकर 170 किलो करने की योजना है। मांग में इस बढ़ोत्तरी को देखते हुये देश की अन्य इस्पात कंपनियां भी अपनी क्षमता विस्तार में जुट गयी है।
सिंह ने सेल के कामकाज की प्रसंशा करते हुये कहा कि पिछले कुछ समय में इसने पूरी कायाकल्प किया है और घाटे से उबर कर इसने पिछली तीन तिमाही से लाभ कमाना शुरू कर दिया है। पिछले साठ वर्ष में कंपनी की उत्पाद क्षमता दस लाख टन से बढ़कर दो करोड़ टन से अधिक हो गयी है। उन्होंने कंपनी को अनुसंधान पर विशेष ध्यान देने तथा कच्चे माल पर होने वाले खर्च को कम करने की सलाह दी।