

संयुक्त राष्ट्र । संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की अध्यक्ष मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा गार्सेज ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से देसी भाषाओं को संंरक्षित करने और इन्हें फिर से चलन में लाने का अाग्रह किया है।
गार्सेज ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में ‘देशी भाषाओं के अंतरराष्ट्रीय वर्ष’ के शुभारंभ समारोह को संबोधित करने हुये कहा, “इस अंतरराष्ट्रीय वर्ष को एक ऐसे मंच के रूप में काम करना चाहिए जहां से देसी भाषाओं को संरक्षित कर और उन्हें फिर से चलन में लाकर हम उनके विलुप्त होने की खतरनाक प्रवृत्ति को पूरी तरह बदल सकते हैं।”
‘देसी भाषाओं के अंतरराष्ट्रीय वर्ष’ का लक्ष्य वर्ष 2019 में पूरे विश्व में देसी भाषाओं के विलुप्त होने के खतरनाक परिणामों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और भाषा, विकास, शांति एवं सांमजस्य के बीच की कड़ी को आपस में जोड़ना है। यूएनजीए की अध्यक्ष ने देसी भाषाओं, पुश्तैनी संस्कृति और ज्ञान के बीच करीबी संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि वे केवल संचार के उपकरण ही नहीं बल्कि उससे कहीं अधिक महत्व रखते हैं, वे मानव विरासत को अगली पीढ़ी को सौंपने का माध्यम हैं।”
उन्होंने कहा, “मानव जाति के लिए प्रत्येक देसी भाषा अमूल्य है। इन भाषाओं ने इतिहास, मूल्य, साहित्य, अाध्यात्मिकता, दृष्टिकोण और ज्ञान को संजो कर रखा है जिनका विकास हजार वर्षों में हुआ है।” उन्होंने कहा, “अभी भी विश्व में 4,000 देसी भाषाएं अस्तित्व में हैं लेकिन इनमें से कई विलुप्त होने के कगार पर हैं।”