मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के प्रावधानों का उल्लंघन करने के मामले में अधिकृत डीलर बैंक आईडीबीआई बैंक लिमिटेड पर 36 लाख 30 हजार रुपए का मौद्रिक जुर्माना ठोका है।
आरबीआई ने शुक्रवार को बताया कि आईडीबीआई बैंक ने एक घटक द्वारा खोले गए विदेशी मुद्रा खाते से आवक प्रेषण को संसाधित करते समय ड्यू डिलिजेंस नहीं किया, जो फेमा के प्रावधानों का उल्लंघन है।
आईडीबीआई बैंक को पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसके जवाब में उसने लिखित स्पष्टीकरण और मौखिक प्रस्तुति दी। हालांकि, मामले के तथ्यों और बैंक के जवाब की समीक्षा के बाद आरबीआई ने उल्लंघन के मामले को सही ठहराया और जुर्माना लगाने का फैसला किया।
आरबीआई ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई विनियामक अनुपालन में खामियों को लेकर की गई है और इसका मकसद बैंक के ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता पर सवाल उठाना नहीं है। यह कदम नियामक मानकों को सख्ती से लागू करने की दिशा में एक संकेत है।
सिटीबैंक पर लगाया 36.28 लाख का जुर्माना
आरबीआई ने उदारीकृत प्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत लेनदेन की रिपोर्टिंग से संबंधित केंद्रीय बैंक के निर्देशों के उल्लंघन के मामले में प्राधिकृत डीलर बैंक सिटीबैंक एनए पर 36 लाख 28 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।
आरबीआई ने शुक्रवार ने बताया कि सिटी बैंक एनए पर यह कार्रवाई एलआरएस के तहत लेनदेन की रिपोर्टिंग से संबंधित आरबीआई के निर्देशों के उल्लंघन के लिए की गई है, जो विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 का हिस्सा है।
केंद्रीय बैंक ने बताया कि बैंक को पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जिसके जवाब में उसने लिखित स्पष्टीकरण और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान मौखिक तर्क पेश किए। हालांकि, तथ्यों और बैंक के जवाब की समीक्षा के बाद आरबीआई ने उल्लंघन के मामले को सही ठहराया और जुर्माना लगाने का निर्णय लिया।
केंद्रीय बैंक ने साफ किया कि यह कदम विनियामक अनुपालन में कमियों को लेकर उठाया गया है और इसका उद्देश्य बैंक के ग्राहकों के साथ किए गए किसी लेनदेन या समझौते की वैधता पर निर्णय देना नहीं है। यह कार्रवाई फेमा नियमों के सख्त पालन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम है।