आबूरोड कितनी पाली जा रहीं रूडिप और आईआरसी गाइडलाइन!

आबूरोड में नगर पालिका द्वारा सड़कों के किनारे लगवाए जा रहे इंटरलॉकिंग टाइल्स जिनकी मोटाई 60 एमएम से कम ही है।

सबगुरु न्यूज-आबूरोड। जनता का पैसा फिजल खर्च नहीं किए जाने के भजनलाल सरकार के कायदों का आबूरोड का भाजपा बोर्ड किस तरह से अनुपालना कर रहा है ये इंटरलॉकिंग टाइल्स के काम में पता चल रहा है। इस काम में भी रूडिप और आईआरसी की गाइडलाइन की कितनी पालना की जा रही है ये इन इंटरलॉकिंग टाइल्सों के फिजिकल वेरिफकेशन से पता चल जाएगा।

आबूरोड में ऋषिकेश मार्ग पर लगाई जा रही इंटरलॉकिंग टाइल्स

-नगर पालिका में होती है ये गाइडलाइन फॉलो
सडक और सडक के किनारे किए जाने वाले काम के लिए भारत में आईआरसी यानि इंडियन रोड कांग्रेस की गाइडलाइन गीता है। इसके आधार पर प्रदेशों में सडक निर्माण का काम करने वाली एजेंसियों ने भी स्थानीय स्तर पर गाइडलालन बना रखी है। नगर पालिकाओं में आम तौर पर सडक निर्माण और उससे जुडे कामों के लिए रूडिप की गाइटलाइन फॉलो की जाती है। आबूरोड नगर पालिका में सडकों के किनारे की कच्ची जगहों पर इंटरलॉकिंग करने के लिए इन्हीं गाइडलाइनों की पालना की जानी चाहिए थी।
-ये हैं स्पेसिफिकेशन
इंटरलॉकिंग टाइल्स के उपयोग के लिए राजस्थान में पीडब्ल्भ्यूडी और रूडिप दोंनों ही लगभग एक ही स्पेसिफिकेशन को फॉलो करती है। फुटपाथ और इंटरनल पार्किगों के लिए एग टवेंटी स्ट्रेंथ की 60 मिलीमीटर या 6 सेंटीमीटर की टाइल्सों को इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन, सडकों के किनारे की खाली जगहों पर जहां पर भारी वाहन भी गुजरते हैं वहां पर एम थर्टी स्ट्रेंथ की 80 मिलिमीटर या 8 सेंटीमीटर थिकनेस की टाइल्स का इस्तेमाल किया जाने का प्रावधान है। वहीं हेवी ट्रेफिक वाली मुख्य सडक पर इंटरलॉकिंग टाइल्स के इस्तेमाल के लिए इसकी थिकनेस 100 मिलीमीटर या 10 सेंटीमीटर और स्ट्रेंथ एम 40 रखनी होती है।
-यहां हो रहा है 60 एमएम का दावा 
आबूरोड नगर पालिका के द्वारा इंटरलॉकिंग टाइल्स सडक के किनारे खाली जगह पर लगाई जा रही हैं। इसकी थिकनेस 80 एममए या आठ सेंटीमीटर होनी चाहिए। लेकिन, ये करीब साढे पांच मिलीमीटर के आसपास मोटाई की हैं। लेकिन दावा ये किया जा रहा है कि ये 60 एमएम की हैं। ऐसे में यदि रूडिप और पीडब्ल्यूडी की गाइडलाइन को स्टेंडर्ड माना जाए तो इनकी थिकनेस कम लग है। स्ट्रेंथ के मामले में ये कहां तक गाइडलाइन के करीब आती है ये इसकी लैब रिपोर्ट से पता चल पाएगा।