ज्योतिष गणना के अनुरूप कैसा रहेगा भारतीय नव वर्ष

विक्रम संवत 2082 चैत्रीय नवरात्रा
अजमेर। भारतीय नववर्ष प्रकृति के पंचमहाभूत और उनके 25 गुणों का एक अनुपम उपहार है जो मूलत और पूर्णत प्रकृति की ऋतुओं पर आधारित है। भले ही कोई नए चन्द्र से, कोई पूर्ण चन्द्र के बाद कृष्ण पक्ष से मास को माने या कोई सूर्य की विशेष तिथि या फसलों के आधार पर मास व नववर्ष माने या कोई प्रमुख घटना विशेष से और कुछ सूर्य के उतरायन व दक्षिणायन से, कही पर्व विशेष से नव वर्ष को माने। यह सब अपनी अपनी मान्यताएं हैं जिससे प्रकृति के किसी एक तत्व को प्रधान कर गणना की जाती है।

भारतीय नववर्ष विश्व जगत में प्रकृति की व्यवस्थाओं और उसके मूल सिद्धांतों पर आधारित है। इस आधार पर गर्मी में अग्नि तत्व की प्रधानता, वर्षा ॠतु में जल तत्व और वायु तत्व की प्रधानता और आकाश तत्व में सर्दी की प्रधानता पृथ्वी तत्व में संतुलन व चार महाभूतों के मिश्रण की प्रधानता होती है। इस कारण ये पंच महाभूत ऋतुओं का एक सुन्दर वातावरण तैयार कर जीव जगत को सुखी व समृद्ध बनाए रखते हैं। पृथ्वी की दैनिक गति और वार्षिक गति के कारण सम्पूर्ण विश्व में ऋतुएं भी उसी प्रकार का समय बदलती है लेकिन पंच महाभूत के पृथ्वी तत्व पर पडने वाले प्रभावों नहीं बदल सकती।

ऋतुओं में बंसत ऋतु का चैत्र मास प्रकृति में नव सृजन कर जीव और जगत को उन्नत व नव चेतना से भर देता है। इस मास के शुक्ल पक्ष के नए चांद के साथ ही वर्ष के संकेत आकाश तत्व में विचरण करने वाले ग्रह देते है कि आने वाले समय में ऋतु चक्र किस तरह के प्रभाव पंचमहाभूत के आधार पर धरती पर पडेंगे। विज्ञान भूगोल शास्त्र और इस के साथ ही ज्योतिष शास्त्र अनुसंधान व अध्ययन कर वर्ष की भविष्यवाणी करते हैं।

चैत्रीय नवरात्रा प्रारम्भ : दिनांक 30 मार्च 2025
घट स्थापना अभिजीत मुहूर्त में दिन को
गणगौर 31 मार्च 2025
सप्तमी 4 अप्रैल 2025
राम नवमी 6 अप्रैल 2025
गुरू 14 मई से मिथुन राशि
राहू 18 मई से कुभ और केतु सिह राशि में होंगे
मंगल 2 अप्रैल को कर्क राशि में
शनि 30 मार्च को मीन राशि में

चैत्रीय शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा 29 मार्च 2025 को शनिवार के शाम 4 बजकर 28 मिनट से शुरू होकर नव विक्रम संवत 2082 प्रारंभ हो जाएगा इस कारण इस वर्ष का राजा शनि होगा। लोकाचार मे नव विक्रम संवत 2082 रविवार दिनांक 30 मार्च 2025 को ही माना जाएगा और उसी दिन बंसतीय नवरात्रा भी शुरू हो जाएंगे। नव विक्रम संवत के समय सिंह लग्न की कुंडली होगी। नव वर्ष प्रवेश पर जगत कुंडली 13 अप्रैल 2025 को 27 बजकर 22 मिनट पर कुंभ लग्न की होगी।

विक्रम संवत की नव वर्ष कुंडली में दूसरे स्थान पर केतु सातवें में शनि तथा आठवें स्थान पर चन्द्र, राहू, सूर्य, बुध व शुक्र ग्रह तथा दसवें स्थान पर गुरू और ग्यारवे स्थान पर मंगल है। शनि वर्ष के राजा है।

जगत कुंडली कुंभ के दूसरे स्थान में राहू, बुध, शुक्र, शनि व तीसरे स्थान पर सूर्य, चौथे स्थान पर गुरू, छठे स्थान पर कर्क, मंगल आठवें पर केतु तथा नवें स्थान पर तुला के चन्द्र होंगे।

विष्णु विशंति का कालचक्र प्रभावशाली श्री सिद्धार्थ व रोद्र नाम गुरू संवत्सर है। नव वर्ष प्रवेश की कुंडली में ग्रहों के कारण राजनीति में भारी उठापटक राजनीतिक संकट होगा तथा बाजार मे अस्थिरता, वर्षा में भारी उतार-चढ़ाव होगा। महंगाई बढेगी। प्राकृतिक प्रकोप बढेंगे भूकंप आदि। धान्य महंगे रहेंगे। पशुओं में बीमारी।

14 मई से गुरू मिथुन राशि में 18 अक्टूबर को कर्क राशि में 5 दिसम्बर को फिर मिथुन राशि में आने के योग बताते हैं कि वर्ष उथल-पुथल भरा रहेगा। जनता मे असंतोष रहेगा। वर्ष ठीक नहीं रहेगा।

ज्योतिषाचार्य
भंवरलाल
जोगणियाधाम, पुष्कर