अजमेर। कुलपति प्रो आनंद भालेराव के नेतृत्व में राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय में ‘एकेडमिक लीडरशिप एंगेजमेंट लेक्चर सीरीज़’ के तहत 1 अप्रैल 2025 को एक महत्वपूर्ण विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया। जिसमें प्रमुख शिक्षाविद् एवं आईआईटी इंदौर के निदेशक प्रो. सुहास एस जोशी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
प्रभावी संचार के लिए रणनीतियां विषय पर प्रो जोशी कहा कि कि यदि आप एक अच्छे संचारक हैं, तो आप स्वाभाविक रूप से शीर्ष 5% में आते हैं और यदि आप अच्छे संचारक नहीं हैं, तो भी आप इस कला को सीख सकते हैं, अभ्यास कर सकते हैं और बेहतर संचारक बन सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि संचार का मुख्य उद्देश्य आपके और श्रोता के बीच संवाद स्थापित करना होता है।
व्याख्यान का सबसे रोचक भाग प्रभावी सार-संक्षेप (abstract) लिखने की प्रक्रिया पर चर्चा थी। प्रो. जोशी ने बताया कि शोध कार्य के नवीन तत्वों को संक्षेप में प्रस्तुत करना अत्यंत आवश्यक है ताकि पाठकों की रुचि बनी रहे। उन्होंने इस संदर्भ में कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले में किए गए एक अनुसंधान अध्ययन का उदाहरण दिया, जिसमें जैव-प्रेरित नवाचार (bio-inspired innovation) के प्रभाव को दर्शाया गया। इस अध्ययन में तिलचट्टों के व्यवहार का अवलोकन किया गया, जो संकरे मार्गों से अपने शरीर को संकुचित कर आसानी से निकलने में सक्षम होते हैं।
इस प्राकृतिक विशेषता से प्रेरित होकर, बर्कले विश्वविद्यालय के इंजीनियरों ने एक ऐसा सॉफ्ट रोबोट विकसित किया जो तिलचट्टों की तरह जटिल वातावरण में आसानी से नेविगेट कर सकता है। यह रोबोट लचीले पदार्थों और अभिनव डिजाइन का उपयोग करता है, जिससे यह आपदा-प्रभावित क्षेत्रों में खोज एवं बचाव अभियानों के लिए विशेष रूप से उपयोगी बनता है।
इससे पूर्व सत्र की शुरुआत राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेरेाव के प्रेरणादायक अध्यक्षीय संबोधन से हुई, जिसमें उन्होंने सफल पेशेवर संवाद में संचार की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने यह बताया कि गैर-मौखिक संकेत—जैसे शरीर की भाषा, चेहरे के भाव, और हाथों के इशारे—बोली गई बातों को प्रभावी ढंग से मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रो. भालेराव ने समझाया कि इन संकेतों को समझना और कुशलता से उपयोग करना विशेष रूप से साक्षात्कार जैसी उच्च-दबाव स्थितियों में संदेश को स्पष्टता और आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करने में सहायक होता है। उनके विचारों ने व्याख्यान के लिए एक आदर्श मंच तैयार किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि प्रभावी संचार व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास के लिए कितना महत्वपूर्ण है।
प्रो भालेराव ने यह भी बताया कि राजस्थान केन्द्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित विशिष्ट व्याख्यान शृंखला विश्वविद्यालय की अकादमिक उत्कृष्टता और बौद्धिक विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। प्रो. सुहास जोशी जैसे विद्वानों को आमंत्रित करके, हम यह सुनिश्चित करते है कि विद्यार्थी, शिक्षक और शोधकर्ता इन ज्ञान-स्रोतों से लाभान्वित हों, जो उनके अकादमिक और व्यावसायिक भविष्य को प्रेरित और समृद्ध करें।
सत्र के समापन पर आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और यह चर्चा की कि वे प्रो. जोशी द्वारा साझा की गई संचार रणनीतियों को अपने अकादमिक और व्यावसायिक जीवन में कैसे लागू कर सकते हैं। यह आयोजन अत्यंत सफल रहा और सभी प्रतिभागियों को प्रभावी संचार के महत्व एवं उसकी व्यावहारिक रणनीतियों की गहरी समझ प्राप्त हुई।
यह आयोजन विशेष रूप से संचार की महत्ता पर एक सशक्त संदेश देकर गया कि इस कौशल में निपुणता प्राप्त करना सफलता और प्रभाव बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण साधन है। अंत में, धन्यवाद ज्ञापन प्रो. सीसी मंडल द्वारा प्रस्तुत किया गया।