स्पेशल कोर्ट ने जयपुर में बम रखने के 4 आरोपियों को दोषी ठहराया

जयपुर। राजस्थान में जयपुर के बम विस्फोट मामलों की विशेष अदालत ने जयपुर में करीब 17 वर्ष पहले हुए श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोटों के दौरान चांदपोल के रामचंद्र मंदिर के पास मिले जिंदा बम मामले में अदालत ने चार आरोपियों को शुक्रवार को दोषी ठहराया।

विशेष न्यायाधीश रमेश कुमार जोशी ने सैफुर्रहमान, मोहम्मद सैफ, मोहम्मद सरवर आजमी और शाहबाज अहमद को बम रखने का दोषी ठहराया है। वह इन दोषियों को आठ अप्रैल को सजा सुनाएंगे।

इन सभी दोषियों को श्रृंखलाबद्ध विस्फोटों के मामले में अदालत ने फांसी की सजा सुनाई गई थी, लेकिन राजस्थान उच्च न्यायालय ने इन्हें बरी कर दिया था। फांसी की सजा के मामले में राज्य सरकार की याचिका उच्चतम न्यायालय में लम्बित है।

13 मई 2008 को जयपुर में आठ श्रृंखलाबद्ध विस्फोट हुए थे, लेकिन नौवां बम फटा नहीं जिसे पुलिस ने चांदपोल बाजार के गेस्ट हाउस के पास बरामद किया था। चारों आतंकियों को गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) की दो, विस्फोटक पदार्थ कानून की तीन धाराओं में दोषी ठहराया गया है। इन धाराओं में अधिकतम आजीवन कारावास का प्रावधान है।

आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने जिंदा बम मामले में इन सभी आरोपियों को 25 दिसंबर 2019 को जेल से गिरफ्तार कर लिया था। एटीएस ने जिंदा बम मामले में पूरक चार्जशीट पेश की थी। इसमें एटीएस ने तीन नए गवाह शामिल किए थे। सुनवाई के दौरान एटीएस ने पत्रकार प्रशांत टंडन, पूर्व अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) अरविंद कुमार और साइकिल की मरम्मत करने वाले दिनेश महावर सहित कुल 112 गवाहों के बयान दर्ज करवाए थे।

दो आरोपी जमानत पर, दो जेल में जिंदा बम मामले में जिन चार आरोपियों को दोषी ठहराया गया है, उनमें से दो आरोपी सैफुर्रहमान और मोहम्मद सैफ जयपुर सेंट्रल जेल में हैं। वहीं, मोहम्मद सरवर आजमी और आरोपी शाहबाज अहमद जमानत पर बाहर हैं।