न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी कोई न्यायिक कार्य नहीं देने का निर्देश

नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से शुक्रवार को कहा कि वे न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को फिलहाल कोई न्यायिक कार्य न सौंपें।

शीर्ष अदालत की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से कहा गया है कि वे न्यायमूर्ति वर्मा को वहां न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालने पर कोई न्यायिक कार्य न सौंपें।

यह घटनाक्रम (न्यायमूर्ति वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने की मंजूरी दिए जाने) के कुछ ही घंटों के भीतर हुआ है, जबकि 14 मार्च को उनके आवास पर आग लगने की घटना के दौरान कथित तौर पर बेहिसाब नकदी की आंतरिक जांच चल रही है।

केंद्र सरकार ने न्यायमूर्ति वर्मा को उनके मूल उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने के संबंध में शुक्रवार 28 मार्च को एक अधिसूचना जारी की थी। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग द्वारा 28 मार्च को जारी इस अधिसूचना में कहा गया है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 222 के खंड (1) द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग करते हुए, राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श के बाद दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में स्थानांतरित करते हैं और उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपने पद का कार्यभार संभालने का निर्देश देते हैं।

उधर, इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश को उनके मूल उच्च न्यायालय में स्थानांतरित किए जाने का विरोध किया। अधिवक्ता एसोसिएशन ने कड़े शब्दों में बयान जारी करते हुए कहा है कि शीर्ष अदालत कॉलेजियम के निर्णय से यह गंभीर सवाल उठता है कि क्या इलाहाबाद उच्च न्यायालय कूड़ेदान है।

शीर्ष अदालत के मुख्य न्यायाधीश खन्ना के नेतृत्व वाले शीर्ष अदालत के कॉलेजियम ने 24 मार्च को केंद्र को न्यायमूर्ति वर्मा को उनके मूल उच्च न्यायालय इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वापस भेजने की सिफारिश करते हुए एक प्रस्ताव जारी किया था।

उच्चतम न्यायालय ने 22 मार्च को एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए न्यायमूर्ति वर्मा के आवास से कथित रूप से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने के संबंध में दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय की जांच रिपोर्ट (जिसमें घटना से संबंधित कथित फोटो और वीडियो भी शामिल हैं) अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दी।

मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने 22 मार्च को ही न्यायमूर्ति वर्मा से दिल्ली उच्च न्यायालय का न्यायिक कार्य वापस लेने का निर्देश दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को दिया था। इसकी वजह तीन सदस्यीय जांच समिति के पूरे प्रकरण की जांच शुरू करना बताया गया था। इस ‘इन-हाउस’ जांच समिति में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी एस संधावालिया और कर्नाटक उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनु शिवरामन शामिल हैं।

शीर्ष अदालत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति खन्ना के निर्देश पर जांच कर रहे दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष न्यायमूर्ति वर्मा ने अपना पक्ष रखते हुए अपने उपर लगे आरोपों से इनकार किया था। साथ ही, उन्होंने नकदी मिलने की रिपोर्ट को उन्हें ‘फंसाने और बदनाम’ करने की साज़िश करार दिया था।