भारतीय नवसंवत्सर की पूर्व संध्या पर एसपीजीसीए में व्याख्यान
अजमेर। भारतीय नवसंवत्सर मात्र कर्मकांड नहीं, अपितु व्यावहारिक, तार्किक एवं वैज्ञानिक जीवन की स्थापना की भारतीय ज्ञान की अनवरत चलती परम्परा है। इसी परम्परा को वर्तमान जीवन में अपनाने के लिए अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (उच्च शिक्षा) की स्थानीय इकाई के द्वारा सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय अजमेर में भारतीय नवसंवत्सर के उपलक्ष पर व्याख्यान का आयोजन किया गया।
इस विशिष्ट व्याख्यान में मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) सुशील कुमार बिस्सु सहायक निदेशक (अजमेर संभाग), कॉलेज शिक्षा राजस्थान एवं प्रदेश सह संगठन मंत्री, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य एवं प्रदेश उपाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार बहरवाल ने की। कार्यक्रम अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. (डॉ) नारायण लाल गुप्ता की गरिमामय उपस्थिति में हुआ।
कार्यक्रम का आरम्भ मां शारदा के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। डॉ. अनूप कुमार अत्रेय ने विषय प्रवर्तन किया। मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ) बिस्सु ने भारतीय कालगणना को जानने, समझने और मानने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारतीय नवसंवत्सर को पूरे भारत में विभिन्न नामों से मनाया जाता है क्योंकि यह देश के प्रत्येक स्थान के स्थानीय महत्त्व को अभिव्यक्ति प्रदान करता है।
प्रो. बिस्सु ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा के बारे में जानकारी के लिए प्रयत्नशील होना चाहिए। आज इन तथ्यों को जानने और समझने वाली पीढ़ी की आवश्यकता है क्योंकि यह हमें आत्मविश्वास एवं विरासत से जुड़ने और भविष्य के विकसित भारत के निर्माण में सक्षम बनाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय ज्ञान परम्परा के स्रोत को हर भारतीय तक पहुँचाने का अप्रतिम प्रयास है।
प्रो. बिस्सु ने कहा कि अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के द्वारा संपूर्ण भारत में नवसंवत्सर के उपलक्ष पर आयोजन कर रहा है। हमें केवल ऊपरी तौर पर नहीं, अपितु हृदय की गहराई से जुड़ना होगा और यदि किसी प्रकार का संदेह हो तो इसके बारे में अधिक से अधिक जानें, पढ़ें। आपका प्रयास और वास्तविक ज्ञान ही भारतीय ज्ञान परम्पराओं में विश्वास उत्पन्न करने वाला होगा।
कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) मनोज कुमार बहरवाल ने भारतीय चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के महत्त्व को बताया और कहा कि यह दिन श्री राम और युधिष्ठिर के राज्याभिषेक का दिवस, झूलेलाल के जन्म, आर्य समाज की स्थापना एवं अजमेर की स्थापना का दिवस भी है। यह दिवस सुदीर्घ काल से विशेष महत्त्व का दिन रहा है। आज भारतीय तत्त्वों से जुड़ने की आवश्यकता है।
धन्यवाद ज्ञापन इकाई सचिव प्रो. दिलीप गेना ने किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. लीलाधर सोनी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सभी संकाय सदस्य उपस्थित थे।