

उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकाल के दरबार में एक दिन पहले दिवाली उत्सव का आयोजन किया गया।
शनिवार को नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) के मौके पर भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार कर उन्हें 56 पकवानों का भोग लगाया गया। इस दौरान भगवान का श्रृंगार देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालू मौजूद रहें।
उज्जैन में दिवाली के एक दिन पहले मनाए जाने वाले रूप चौदस का भी खासा महत्व हैं। धार्मिक नगरी उज्जैन में दिवाली पर्व की शुरूआत रूप चौदस के दिन से हो जाती हैं और इसकी शुरूआत होती हैं बाबा महाकाल के दरबार से।
रूप चौदस के दिन रूप निखारने के लिए भगवान महाकाल को सबसे पहले जल और औषधियों से स्नान कराया गया। इस दौरान उनका हल्दी चंदन से उबटन भी किया गया। जिसके बाद महाकाल का गर्म पानी से अभ्यंग स्नान हुआ।
स्नान के बाद बाबा महाकाल का भांग, मेवा और सोने-चांदी के आभूषणों से दिव्य श्रृंगार किया गया, फिर अन्नकूट का आयोजन किया गया।
महाकाल का श्रृंगार पूरा होने के बाद उन्हें 56 पकवानों का भोग लगाया गया और दिवाली की शुरूआत करते हुए फुलझड़ियां भी जलाई गई।