

उदयपुर। राजस्थान सरकार द्वारा लोक सेवकों पर एफआईआर की अनुमति के सम्बंध में लाए जा रहे अध्यादेश को लेकर उदयपुर में भी विरोध उभरा है। कांग्रेस व आप पार्टी सहित कई कानूनविदों व सामाजिक-स्वयंसेवी संगठनों ने भी इसका विरोध किया है।
जानकारों ने तो यहां तक कहा है कि यह सूचना के अधिकार को भी प्रभावित करेगा। कागजों में अनियमितता सामने आने के बाद भी सरकार तुरंत एक्शन के बजाय 180 दिन का समय ले रही है, तब तक तो कागज बदल दिए जाएंगे, यह बात हर आम आदमी की समझता है। ऐसे में सूचना के अधिकार का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा।
कांग्रेस नेताओं ने अपना विरोध दर्ज कराया है और ऊपर से आदेश के बाद वे इस सम्बंध में विरोध प्रदर्शन करेंगे, जबकि आप पार्टी ने इस अध्यादेश के खिलाफ आंदोलन के लिए ऐलान कर दिया है।
आप पार्टी के स्थानीय नेताओं ने बताया कि यह विरोध राज्यव्यापी न रहकर पूरे देश में राजस्थान सरकार के इस कदम को जनता के बीच रखा जाएगा। उनका आरोप है कि यह अध्यादेश भ्रष्टाचार के संरक्षण का अध्यादेश है और जनता को इसकी हकीकत पता चलनी ही चाहिए।