राइजिंग राजस्थान को बना दिया लाइजिंग राजस्थान : टीकाराम जूली

जयपुर। राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य सरकार, उसके मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ पर राइजिंग राजस्थान को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि राइजिंग राजस्थान को लाइजिंग राजस्थान बना दिया गया है।

जूली ने गुरुवार को सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि जैसे ही उन्होंने इस योजना पर सवाल उठाए, भाजपा के मंत्री, विधायक और पूर्व मंत्री सरकार के बचाव में उतर आए। उन्होंने कहा कि सबकी भाषा एक जैसी है, जिससे स्पष्ट होता है कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने ही जनता को गुमराह करने के निर्देश दिए हुए हैं।

जूली ने कहा कि राजेंद्र राठौड़ तो स्वयं नेता प्रतिपक्ष रहे हैं, मुझे विश्वास था कि आप इस पद की जिम्मेदारियों से भली-भांति परिचित होंगे लेकिन अब प्रतीत होता है कि आप भी सरकार और इनके मंत्रियों के साथ जनता को गुमराह करने में लगे हुए है तभी राइजिंग राजस्थान को ‘लाइजिंग राजस्थान’ बना दिया गया।

उन्होंने कहा कि सरकार ने 35 लाख करोड़ रुपए से अधिक के एमओयू का दावा किया है लेकिन जब उन्होंने सदन में इन निवेशकों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की तो प्रदेश के मुखिया कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। उन्होंने कहा कि कोई बात नहीं कम से कम ट्वीट करके ही जनता को 35 लाख करोड़ के आंकड़े उपलब्ध करवा दीजिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

जूली ने आरोप लगाया कि कई एमओयू केवल जमीन हथियाने के लिए किए गए हैं। उन्होंने कहा कि कई कंपनियां सिर्फ कागजों में हैं लेकिन हजारों करोड़ रुपए के एमओयू किए गए, यही वजह है कि मुख्यमंत्री को कहना पड़ा कि निवेशक फोन नहीं उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राइजिंग राजस्थान को लेकर रोज खबरें आ रही हैं कि न तो कोई जमीन आवंटित हो रही है और न ही निवेशक इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

जूली ने भाजपा सरकार के 15 महीनों में राज्य की जीएसडीपी में 30.78 प्रतिशत की वृद्धि के दावे को भी झूठ का पुलिंदा करार दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के 15 महीने के कार्यकाल में छलावे के सिवाय कोई ठोस कार्य नहीं हुआ।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता जनता नहीं बल्कि उद्योगपति मित्रों की जेबें भरना है। उन्होंने कहा कि इस सरकार की उपलब्धि तो मिट्टी से बन रही सड़कें, स्कूल के विद्यार्थियों के मुंह से छिनता निवाला, खेल सामग्री में घोटाले, अवैध बजरी खनन, भूमाफिया राज, बदहाल कानून व्यवस्था और बेलगाम अफसरशाही है।