ग्रीष्मकालीन शिविर : मांडना से सजे पक्षियों के परिंडे

अजमेर। ललित कला अकादमी जयपुर और कला, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की ओर से डिजाइन इकोल कॉलेज अजमेर में चल रहे ग्रीष्मकालीन शिविर के दौरान तीसरेे दिन बुधवार को नवोदित कलाकारों ने पक्षियों के पानी पीने के परिंडो को राजस्थानी मांडणा से सुसज्जित किया।

कलाकारों ने मिट्टी के परिंडो पर पीली पेवडी का लेप किया, उसके उपरांत प्राकृतिक रंग गेरू और पांडु से सुंदर-सुंदर राजस्थानी पगलिया, फुलड़ा-फुलडी, चौक का मांडणा, चौपड़ हीड, पंखी के मांडने पारंपरिक तरीकों से चित्रांकित किया। इसके बाद उन्हें छोटे-बड़े काचों से सुसज्जित किया। शिविर के समापन पर इन्हें प्रदर्शित किया जाएगा और विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।

सभी शिविरार्थियों को वितरित कर यह प्रतिज्ञा कराई जाएगी गर्मी के दिनों में छायादार स्थान पर पक्षियों के लिए पानी भरकर नित्य प्रतिदिन रखेंगे। शिविर प्रशिक्षक संजय कुमार सेठी ने बच्चों को दो रंगों का मांडणा में किस प्रकार प्रयोग किया जाता है इसकी जानकारी दी। उन्हें चौपड़ का मांडणा बनाना पारंपरिक विधि से सिखाया। कला प्रशिक्षक मीनाक्षी मंगल, इंदु खंडेलवाल, प्रियंका सेठी, सुमन वैष्णव, ऋषभ प्रताप सिंह ने सक्रिय सहयोग किया।

मीडिया प्रभारी अंबिका हेडा ने बताया कि शिविर में गुरुवार को विद्यार्थियों को हस्त निर्मित हाथ थेलों पर मांडना चित्रांकन का प्रशिक्षण दिया जाएगा और उन्हें प्रयोग में ला कर पॉलिथीन हटाओ पर्यावरण बचाओ का संदेश प्रसारित करेंगे।

शिविर संयोजक दीपक शर्मा के अनुसार शिविर में 9 वर्ष से 55 वर्ष की उम्र के छात्र छात्राएं व महिलाएं भाग ले रही है। बुधवार को संस्कार भारती अजमेर इकाई के महासचिव कृष्ण गोपाल पाराशर, महेंद्र जैन मित्तल एवं सुमन वैष्णव व युवा गायक नवदीप सिंह झाला ने शिविर का अवलोकन किया एवं बच्चों द्वारा पारंपरिक लोक कलाओं को सीखने के उद्देश्य से लगाए गए शिविर की प्रशंसा की।